विवरण
शून्य से एक आकृति उभरती है, उसका शरीर आकाशगंगाओं, सूर्यों और सूक्ष्म जगतों का एक मोज़ेक है। इसके पीछे, एक सुनहरा सूर्य किरणें बिखेरता है, जो घूमते वृत्तों और आँखों के एक महासागर को प्रकाशित करता है, जो ब्रह्मांडीय और अंतरंग दोनों प्रतीत होते हैं। यह कोई साधारण देह नहीं है — यह अनंतताओं का एक पात्र है, जिसमें तारों का जन्म और मानवीय चेतना का भार दोनों समाहित हैं। 'ब्रह्मांड और आत्मा' स्वयं अस्तित्व की एक समय-छाप है, जहाँ बाहरी अनंत और आंतरिक अनंत एक में विलीन हो जाते हैं।.





























