विवरण
एक ही समय गर्भ और कब्र, सर्पिल पिघले हुए सूर्यों की चमक से दमकता है। वृत्त अनंत तक भीतर की ओर लहरें बिखेरते हैं, पुनरावृत्ति, जन्म और पतन का संकेत देते हुए। आँख आगे खिंचती है, गिरते हुए भी आरोहण करती हुई, जब तक क्षितिज प्रकाश के केंद्र से अविभाज्य न हो जाए। स्वर्णिम सर्पिल कोई मार्ग नहीं है, बल्कि किरणमय पुनरावृत्ति में अवतरण है — अनंतता जिसे भीतर से बाहर तक देखा जाता है।.





























